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Tuesday, November 24, 2015

सहिष्णुता (Tolerance )

जाकर पूछो क्या परिभाषा है सहिष्णुता की
और कौन सी धरा है सहिष्णुता की प्रतीक
स्वछंद विचारो को खुलकर समाज को बतलाते हो
जिस देश ने तुमको गौरव दिया उसी को असुरक्षित बतलाते हो

सहिष्णु है वो कश्मीरी पंडित जिन्होंने अपनों को खोया है
सहिष्णु है वो सिक्ख जो अलगाववादी धारा में रोये
सहिष्णु है वो लोग जो दंगो और आतंको से दो चार हुए
और सहिष्णु है वो जो कुदरत की आपदा से पार हुए

तुमने कब कौन सी कठिनाईयों को झेला है
सिर्फ भौतिकता की देवी से ही हमेशा खेल है
जीवन में जो शीर्ष मिला वो इसी धरा की देन है
आज यदि सुरक्षित हो तो ये सहिष्णुता की देन है

विविध रंग के मोतियों को, पिरो कर, बानी देश की माला है
हर दाने ने अगले दानो को बांधकर संभाला है
यही नियति है हमारे सहिष्णु गौरवशाली देश की
कोई भी उछाल सकता है गरिमा मेरे देश की

बारिश की सभी बुँदे एक जैसी नहीं होती
परन्तु उनका गंतव्य एक ही होता है
अगर कुछ बुँदे कही रुक भी जाए
तब भी समुद्र (राष्ट्र) सहिष्णु ही होता है

राष्ट सहिष्णु ही होता है........

Saturday, November 21, 2015

मनुष्यता (Humanity)

 तुम कौन हो तुम्हारा अस्तित्व क्या है ?
क्या तुम मनुष्य हो तुम्हारा व्यक्तित्व क्या है ?

है मिला जीवन तुम्हे कुछ तो प्रारब्ध होगा
इस समूचे विश्व में तेरा कोई कर्त्तव्य होगा..
या यही उद्देश्य है की बस सभी भौतिक मिले
या कही उद्देश्य ऐसा की तुम्हे कीर्ति मिले

यदि तुम्हे यह दम्भ है के तुम एक मनुष्य हो
तो ये जीवन करो तर्पण समाज के उद्धार में
त्याग तो सब मोह भौतिक
विश्व के कल्याण में

ये तेरी काया तो सुखी लकडियो का ढेर है
समय दीमक की तरह करता बसेरा है जहा,
जब अभिलिप्तता पहुंच जाएगी उनकी शीर्ष पर
सड़ के मीट्टी बन कर मीट्टी टीला बन जायेगा वहाँ

कुछ नहीं ले जा पायेगा सुखी मीट्टी में दृढ़ता नहीं
सब यही रह जायेगा कुछ प्राप्त होगा नहीं
फिर तेरी आत्मा करेगी अट्टहास और तुझे धिक्कारेगी
यही है यदि मनुष्य तो मुझे फिर मीट्टी मत बनाना यही पुकारेगी

फिर मीट्टी मत बनाना यही पुकारेगी ||

Monday, September 14, 2015

संघर्ष है


संघर्ष है पर्याय जीवन का
संघर्ष है अध्याय जीवन का
आधुनिकता के करालो में
संघर्ष है अस्तित्व का रक्षण
है मानते सभी मुझे मातृभाषा
पर प्रेयसि है अब्ब ये आंग्लभाषा
कलियुग की वेदी है बड़ी चौड़ी
ना चाह है अब जग को ये माता की
कहते है के हम हो गए है परिपक्व
छाया नहीं अब्ब चाहिए माँ की
प्रेयसि का आँचल ही सुहाता अब
वो दिन पुराने हो चुके है अब
माता की लोरी थी सुहानी जब
हिंदी है रोती अपनी कहानी कह
संघर्ष है जीवन मेरा ये अब

Tuesday, May 12, 2015

अधूरी ख्वाहिशे Adhuri Khwahise - Hindi Poems: वही प्रारब्ध होगा

अधूरी ख्वाहिशे Adhuri Khwahise - Hindi Poems: वही प्रारब्ध होगा: निर्वात का स्पंदन, भावों का मंथन प्राण वायु की मलंगता, स्मृत्य की प्रचंडता निष्क्रिय सी हो गयी है, स्वयं में ही खो गयी है शुसुम्न अवस्था...

Sunday, May 10, 2015

वही प्रारब्ध होगा

निर्वात का स्पंदन, भावों का मंथन
प्राण वायु की मलंगता, स्मृत्य की प्रचंडता
निष्क्रिय सी हो गयी है, स्वयं में ही खो गयी है
शुसुम्न अवस्था में लिप्त, परजीव सी हो गयी है
अर्ध भाव सा, अल्प विराम सा
अर्ध पूर्ण सा, अर्ध रिक्त सा
जीवन का ये आनंद, विछोह के अंधकार में
सुप्त सा हो गया है, व्यर्थ सा हो गया है
नवीन प्राण वायु की अभिलाषा, तुम से सहचार होने की आशा
है यही बस उपाय अब, तभी चेतन होगा सब
फिर वही उन्माद होगा, प्रेम का आह्लाद होगा
फिर वही सुकून होगा, और वही प्रारब्ध होगा.