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Saturday, September 8, 2012

परिभाषा बन गयी हो तुम (You are the definition)

जीवन के एकाकीपन में अब जीवन की परिभाषा बन गयी हो तुम,
सोयी आँखों में मधुर स्वप्न की अभिलाषा बन गयी हो तुम।
माना नहीं हो तुम मेरे प्रत्यकछ ,परोक्ष ही सही,
हर प्रहर मेरी साँसों का स्पंदन बन गयी हो तुम ।।

हू अभी मै अकेला ,पर अकेलापन लगता नहीं,
खुद को देखता हू तो लगता है मुझी में समां गयी हो तुम।
कभी खामोश रहता हू तो भी ऐसा आभास होता है ,
हवा की सनसनाहट से के, मुझसे बात कर रही हो तुम।

ख्वाबों के हिरण मन में मेरे कुलाचे भर रहे है अब,
है बड़े आतुर वो तुम्हे छूने के लिए।
वक़्त बन गया है जैसे शत्रु , आगे बढ़ता नहीं,
मुझे और प्रतीक्षा करने को  क्यों  कह रही हो तुम।

कभी देखा है धूप में अस्तित्व से परछाई का बिछोह ,
कभी देखा है बहती नदी को बिना किनारों के,
तुम्हारे बिन अब मेरी परिभाषा नहीं पूरी,
मेरे अधूरी परिभाषा की पूर्ण भाषा बन गयी हो तुम।।

Wednesday, May 30, 2012

चलते चलते मै बहुत दूर निकल आया हू - chalte chalte mai bahut dur nikal aaya huu

चलते चलते मै बहुत दूर निकल आया हू.....
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों को बक्सों में समेट कर,
किसी की हंसी, किसी के आंसू और किसी की चाह को,
दिल के किसी अनजान कोने में संजोकर,
चलते चलते मै बहुत दूर निकल आया हू.....

है कई अपने पीछे किसी गलियों में ,
थे कई पराये जिन्हें मै अपना मानता था...
गलियों में बितायी हर यादों की कसमसाहट को,
सोच की किसी ढकी परतो में दबाकर,
चलते चलते मै बहुत दूर निकल आया हू.....



सीखा था बहुत कुछ, कुछ धुंधले से सफ़ेद अक्सो से,
खोया था बहुत कुछ, कुछ बेबाक से अनसुलझे अक्सो से,
चाहता हू की कुछ नए अक्स मेरे आइनों से झांके अब,
पुराने अक्सो के आईने के टुकडो को समेटकर ...
चलते चलते मै बहुत दूर निकल आया हू.....

नयी दिशाए, नयी मंजिले और नए रास्ते,
बाहें फैलाये कह रही है की आओ गले लग जाओ तुम,
नयी ऊँचाईयों को नए तरीकों से छुओ,
नए वातावरण में अपने अस्तित्व का समावेश करो,
मुड़कर मत देखो की तुमे क्या है खोया ...
क्योकि कुछ नहीं मिलेगा तुम्हे अब पुरानी राहों में ...
चलते चलते मै बहुत दूर निकल आया हू.....


chalte chalte mai bahut dur nikal aaya huu.....
kuch khatti kuch meethi yaado ko bakso me samet kar,
kisi ki hansi , kisi ke aansu aur kisi ki chah ko,
dil ke kisi anjaan kone me sanjokar,
chalte chalte bahut dur nikal aaya huu....

hai kai apne peeche kisi galiyo me,
the kai paraye jinhe mai apna manta tha...
galiyo me bitayi har yaado ki kasmasahat ko,
soch ki kisi dhaki parto me dabakar,
chalte chalte mai bahut dur nikal aaya huu....

seekha tha bahut kuch, kuch dhundhle se safed akso se,
khoya tha bahut kuch, kuch bebak se unsuljhe akso se,
chahta huu ki kuch naye aks mere aaino se jhaanke abb,
purane akso ke aaine ke tukdo ko sametakar
chalte chalte mai bahut dur nikal aaya huu.....

nayi dishaye, nayi manjile aur naye raste,
baahe failaye kah rahi hai ki aao gale lag jao tum,
nayi unchaiyo ko naye tarike se chuo,
naye vatavaran me apne astitva ka samavesh karo,
mudkar mat dekho ki tume kya hai khoya...
kyoki kuch nahi milega tumhe abb purani raho me...
chalte chalte mai bahut dur nikal aaya huu.....

Monday, February 27, 2012

मेरे हमसफ़र - My Life Partner

अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पलो का सफ़र
तय करेंगे साथ में क्योकि साथ है अब हमसफ़र ।
सुख में, दुःख में, आशा में, निराशा में,
इर्ष्या में, द्वेष में, प्यार में , तिरस्कार में,
प्रभात में , अन्धकार में, प्यार के श्रृंगार में ,
आने वाले जीवन का हर दिन, हर रात , हर पल और हर प्रहर,
तय करेंगे साथ में क्योकि साथ में है अब हमसफ़र ।

अधूरी इच्छाओ में , पुरे सपनों में,
अनकही बातो में, समझी भावनाओ में,
व्याकुल मन में, हर्सोत्साहित तन में,
जीवन के अनचाहे पलो का हर कहर,
तय करेंगे साथ में क्योकि साथ में है अब हमसफ़र ।
भविष्य की उपलब्धियों में , भविष्य की परेशानियों में ,
भविष्य की खुशियों में , भविष्य के क्लेश में ,
भविष्य के सन्नाटो में , एक मात्र सहारे के स्पर्ष का अनुभव,
प्रेम में भरे हुए लिपटे हुए भावात्मुक पंछियों की तरह,
तय करेंगे हर सफ़र, क्योकि साथ में है अब हमसफ़र ।   
 
 
  

Wednesday, February 22, 2012

मेरा अस्तित्व My Identity

आत्मबल की असीमता है मेरे अस्तित्व में,
उन्माद की सुक्छमता है मेरे अस्तित्व में,
झंकार का आवृत है प्रारब्धता अस्तित्व में,
संकल्प की अविनाशिता है मेरे अस्तित्व में ।

बवंडर में घिरी हुई जरा से कश्तियो को देखिये,
है बड़ी आतुर वो परस्त होकर लहरों में डूबने के लिए,
हर कोई व्याकुल है, नहीं चाहता की जीवन अंत हो,
अंत तक के अनंत कष्ट को झेलना है मेरे अस्तित्व में ।

हर कोई जन आता यहाँ, निरुदेश्य और निर्विकारमय,
ना कोई होता है लक्ष्य और ना कोई प्रेरणामय,
जब ढले शाम जीवन की, चला जाता है बांसों की बंदिशों पर,
खो के धुंए के भंवर में भी, अमरता है मेरे अस्तित्व में ।। 

Friday, January 13, 2012

क्या मै पराया हो रहा हू Stranger

आज ऐसा लगा की यादो की झुरमुटो से कोई मुझे देख रहा है,
झिलमिलाती भरी हुई आँखों से कुछ पूछ रहा है|
कह रहे है उसके सूखे लब की ये क्या हो रहा है,
आज ऐसा क्यों मुझे लग रहा है की तुम पराये हो रहे हो||

आँखों की उसकी उदासी दिल में टीस मारती है,
चेहरे की झूठी मुस्कराहट दिल के सुकून को दफना रही है|
चाहता हु मै उससे मिल कर अपना दिल हल्का कर लू,
पर वक़्त की बेड़िया कदमो पर खंजर चला रही है ||


पता नहीं तुझसे मुझे ये कैसा लगाव है,
सब लग रहे है खामोश ये कैसा बदलाव है|
मेरे वर्तमान का दर्द तेरे सुखद भविष्य का आधार है,
इसीलिए हो रहा हू पराया, और ये समय का प्रहार है||

कैसे रहूँगा तेरे बगैर सोच कर भी डर लगता है ,
जब भी होगा दर्द तेरे अच्छे भविष्य को सोचकर मुस्कुरा लूँगा|
हां बहुत बिखरुंगा जब तेरी मीठी यादे मुझे घेरेंगी,
पर उन बिखरे टुकडो में तेरी धूमिल हंसी देख कर जिन्दा हो लूँगा||