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Friday, January 13, 2012

क्या मै पराया हो रहा हू Stranger

आज ऐसा लगा की यादो की झुरमुटो से कोई मुझे देख रहा है,
झिलमिलाती भरी हुई आँखों से कुछ पूछ रहा है|
कह रहे है उसके सूखे लब की ये क्या हो रहा है,
आज ऐसा क्यों मुझे लग रहा है की तुम पराये हो रहे हो||

आँखों की उसकी उदासी दिल में टीस मारती है,
चेहरे की झूठी मुस्कराहट दिल के सुकून को दफना रही है|
चाहता हु मै उससे मिल कर अपना दिल हल्का कर लू,
पर वक़्त की बेड़िया कदमो पर खंजर चला रही है ||


पता नहीं तुझसे मुझे ये कैसा लगाव है,
सब लग रहे है खामोश ये कैसा बदलाव है|
मेरे वर्तमान का दर्द तेरे सुखद भविष्य का आधार है,
इसीलिए हो रहा हू पराया, और ये समय का प्रहार है||

कैसे रहूँगा तेरे बगैर सोच कर भी डर लगता है ,
जब भी होगा दर्द तेरे अच्छे भविष्य को सोचकर मुस्कुरा लूँगा|
हां बहुत बिखरुंगा जब तेरी मीठी यादे मुझे घेरेंगी,
पर उन बिखरे टुकडो में तेरी धूमिल हंसी देख कर जिन्दा हो लूँगा||