2ndAdd

Thursday, October 14, 2010

मेरा पागलपन My Madness

कल सोचा खुद के बारे में तो पाया खुद का पागलपन ,
अँधेरे कोठी में गूंजता खुद का कोई करुण रुदन |
अनंत अन्धकार की असीम अविनाशी शक्ति का स्पर्श,
भरी हुई भीड़ में सुनी आँखों का एकाकीपन |
मै खो गया उन् गहराई में जो थी मेरे भय का प्रतिबिम्ब,
निश्चेत निर्विकार शरीर में जैसे ना हो साँसों का स्पंदन|
झंझावात विचारो का, सपनो का और अभिलाषाओ का ,
भूत की यादो का, चिता की आहुतियो के मध्य से होता पुनर्जीवन|
क्या हो गया था मुझको शरीर निष्प्राण लग रहा था,
कैसे करू, सुखी धरती जैसे जीवन में हर्ष, वर्षा का आह्वाहन |
भरी हुई आँखों ने खोला अन्धारक द्वार सूर्य की रस्मियो से होकर परास्त,
ऐसा लगा, हुआ नया जीवन प्रारब्ध और जो देखा था वो मेरा था पागलपन|
वो मेरा था पागलपन ||

Yesterday i was thinking about my madness,
vibration of tears inside the dark room,
feelings of extreme loneliness,
pain of the alone eyes in middle of crowed.
I was lost in depth of my past's memory, by them I feared alot,
it seems that there is no living inside my body,
cyclones of thoughts , dreams and hopes surrounded me,
like ghost of past burning from the flame of my life.
I don't know what happen to me, I felt myself as a dead body,
how will i overcome from this situation?
my tired eyes slowly open up, because they felt warmness of Sun,
ohh My God it was just a dream, and my madness....
Its my madness.....

8 comments:

  1. बहुत बढ़िया लगी आपकी रचना. यथार्थवादी राहें मन और कर्म की थाहें.

    ReplyDelete
  2. सोच को शब्द देने का सार्थक प्रयास - शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  3. सुंदर अभिव्यक्ति. आपके ब्लाग पर आकर अच्छा लगा.. चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. हिंदी ब्लागिंग को आप नई ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है....
    ....
    ऑनलाइन क्विज में भाग लेकर एक माह में लाख रुपये जीतने के शानदार मौके की जानकारी के लिये यहां पधार सकते हैं - http://gharkibaaten.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. हिन्दी ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है..ऐसी ही सुन्दर पोस्टों से हिन्दी ब्लॉग को समृद्ध करते रहिये.. नवरात्र और दशहरे की शुभकामनाएं..

    ReplyDelete
  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त करने का कष्ट करें

    ReplyDelete
  6. aap sabhi ke utsah varrdhan ka prarthi ek baar fir apne hriday ke kareeb ke iss kavita ko publish kar raha huu...

    ReplyDelete