आत्मबल की असीमता है मेरे अस्तित्व में,
उन्माद की सुक्छमता है मेरे अस्तित्व में,
झंकार का आवृत है प्रारब्धता अस्तित्व में,
संकल्प की अविनाशिता है मेरे अस्तित्व में ।
बवंडर में घिरी हुई जरा से कश्तियो को देखिये,
है बड़ी आतुर वो परस्त होकर लहरों में डूबने के लिए,
हर कोई व्याकुल है, नहीं चाहता की जीवन अंत हो,
अंत तक के अनंत कष्ट को झेलना है मेरे अस्तित्व में ।
हर कोई जन आता यहाँ, निरुदेश्य और निर्विकारमय,
ना कोई होता है लक्ष्य और ना कोई प्रेरणामय,
जब ढले शाम जीवन की, चला जाता है बांसों की बंदिशों पर,
खो के धुंए के भंवर में भी, अमरता है मेरे अस्तित्व में ।।
उन्माद की सुक्छमता है मेरे अस्तित्व में,
झंकार का आवृत है प्रारब्धता अस्तित्व में,
संकल्प की अविनाशिता है मेरे अस्तित्व में ।
बवंडर में घिरी हुई जरा से कश्तियो को देखिये,
है बड़ी आतुर वो परस्त होकर लहरों में डूबने के लिए,
हर कोई व्याकुल है, नहीं चाहता की जीवन अंत हो,
अंत तक के अनंत कष्ट को झेलना है मेरे अस्तित्व में ।
हर कोई जन आता यहाँ, निरुदेश्य और निर्विकारमय,
ना कोई होता है लक्ष्य और ना कोई प्रेरणामय,
जब ढले शाम जीवन की, चला जाता है बांसों की बंदिशों पर,
खो के धुंए के भंवर में भी, अमरता है मेरे अस्तित्व में ।।
very nice lines Pushkar, really heart touching.....very very nice......lines penned down.
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